Uttar pradesh

जनता ने किसी को देश चलाने की जिम्मेदारी दी है तो इसका मतलब यह नहीं है कि वो व्यक्ति...

जनता ने किसी को देश चलाने की जिम्मेदारी दी है तो इसका मतलब यह नहीं है कि वो व्यक्ति...

 


कृष्णकांत

जनता ने किसी को देश चलाने की जिम्मेदारी दी है तो इसका मतलब यह नहीं है कि उस व्यक्ति को देश बर्बाद करने, बेच देने या बंधक बना लेने का अधिकार मिल गया है. यह बात समझनी बहुत जरूरी है कि हमारे पुरखों ने कुर्बानियां देकर, फांसी चढ़कर, जेल काटकर, लाखों जिंदगियां देकर इस देश को आजाद कराया और एक गौरवशाली लोकतंत्र की बुनियाद रखी, वह सब खतरे में है. 


पेगासस स्पाइवेयर के जरिये देश की प्रमुख संस्थाओं न्यायपालिका, चुनाव आयोग, जांच एजेंसियां और विपक्ष को निशाना बनाया गया. जिनकी जासूसी की गई, उनमें सुप्रीम कोर्ट के जज, चुनाव आयुक्त, सीबीआई, मंत्री, विपक्षी नेता, बीजेपी नेता, पत्रकार, नौकरशाह और सामाजिक कार्यकर्ताओं के नाम सामने आए. 


इस प्रकरण से प्रथमदृष्टया यह समझ में आता है कि पेगासस के जरिये उन सभी संस्थाओं और व्यक्तिओं को निशाना बनाया गया, जो सरकार पर अंकुश लगाते हैं, सरकार के खिलाफ आवाज उठा सकते हैं या डेमोक्रेसी में चेक एंड बैलेंस को बनाए रखते हैं. 


आज पेगासस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने कुछ गंभीर टिप्पणियां कीं और एक स्वतंत्र जांच कमेटी बनाने का निर्णय लिया. कोर्ट ने कहा- "राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर सरकार को हर बार छूट नहीं मिल सकती. देश के हर नागरिक की निजता की रक्षा होनी चाहिए. जासूसी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और प्रेस की भूमिका पर गलत प्रभाव डाल सकती है. कहा गया कि एजेंसियों द्वारा एकत्र की गई जानकारी आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में बेहद जरूरी होती हैं. लेकिन निजता के अधिकार में तभी हस्तक्षेप हो सकता है जब राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा के लिए यह बहुत जरूरी हो. सरकार ने न तो आरोपों का पूरी तरह खंडन किया, न विस्तृत जवाब दाखिल किया. इस मामले में केंद्र ने जो सीमित एफिडेविट दिया है, वह साफ और पर्याप्त नहीं है. अगर अवैध तरीके से जासूसी हुई है तो यह निजता और अभिव्यक्ति जैसे मौलिक अधिकारों का हनन है. जब मामला लोगों के मौलिक अधिकारों से जुड़ा हो तो कोर्ट मूकदर्शक बन कर नहीं बैठा रह सकता. ऐसे आरोपों से सभी नागरिक प्रभावित होते हैं. प्राइवेसी सिर्फ पत्रकारों और पॉलिटिशियंस का मुद्दा नहीं बल्कि हर व्यक्ति के अधिकार की बात है. सभी फैसले संविधान के मुताबिक होने चाहिए."


कोर्ट का निर्णय आने के बाद अपनी प्रेस ब्रीफिंग में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने महत्वपूर्ण सवाल किए. 


उन्होंने कहा, "पेगासस देश और देश के इंस्टीट्यूशन पर एक आक्रमण है. पार्लियामेंट में हमने पेगासस का मुद्दा उठाया था. हमारे तीन सवाल थे:

पहला- पेगासस को किसने ख़रीदा? क्योंकि पेगासस को कोई भी प्राइवेट पार्टी व्यक्तिगत रूप से नहीं खरीद सकती है. पेगासस को सिर्फ सरकार ही खरीद सकती है. दूसरा सवाल- पेगासस से किन-किन लोगों को निशाना बनाया गया? किन लोगों की टैपिंग की गयी? क्योंकि एक लिस्ट है जिसमें चीफ़ जस्टिस का नाम है, विपक्ष के नेताओं का नाम है, बहुत से कार्यकर्ताओं का नाम है. तीसरा सवाल- क्या पेगासस का डेटा किसी और देश के पास भी था या सिर्फ हिन्दुस्तान की सरकार के पास? हमें जवाब नहीं मिला, हमने पार्लियामेंट को रोका और विपक्ष एक साथ मिलकर खड़ा हुआ."


उन्होंने कहा, "हमने संसद इसलिए रोकी, क्योंकि पेगासस हमारे देश पर आक्रमण है, हमारे लोकतंत्र पर आक्रमण है और हमारी जो वाइब्रेंट डेमोक्रेसी है उस पर आक्रमण हुआ है. यह लोकतंत्र को नष्ट करने का एक प्रयास है. ये कोर्ट का मुद्दा है तो जांच हो रही है; हम चाहेंगे कि संसद में इसकी चर्चा हो; पेगासस के लिए प्रधानमंत्री या गृहमंत्री ने आर्डर किया है; ये कोई दूसरा व्यक्ति आर्डर नहीं कर सकता है. साफ़ है कि सरकार ने, प्रधानमंत्री या गृहमंत्री ने कुछ तो गैर क़ानूनी काम किया है, वरना आसानी से डिटेल दे देनी चाहिए थी कि हां हमने किया या नहीं किया; अगर वो जवाब नहीं दे पा रहे हैं तो इसका कारण यही है कि कुछ न कुछ छिपाया जा रहा है." 


"हिन्दुस्तान का जो संस्थागत ढांचा है, उसमें इलेक्शन कमीशन है; संसद है, चीफ़ मिनिस्टर है; यह हमारे लोकतान्त्रिक ढांचे पर आक्रमण है और एक-दो लोग ही इसके मास्टरमाइंड हैं."


इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतंत्र जांच कमेटी बनाकर सटीक निर्णय लिया है, लेकिन सभी विपक्षी दलों को मिलकर इस मुद्दे पर सरकार को मजबूर करना चाहिए कि जवाबदेही तय हो. राहुल गांधी जो कह रहे हैं, वही बात पत्रकारों, ​लेखकों, कार्यकर्ताओं ने बार बार दोहराई है कि यह लोकतंत्र और इसकी संस्थाओं पर आक्रमण है. यह आक्रमण किसी भी कीमत पर रुकना चाहिए. देश चलाने की जिम्मेदारी का मतलब यह नहीं होता कि आपको देश बेच देने या बर्बाद करने का भी अधिकार मिल गया है. 


यह लोकतंत्र किसी नेता या पार्टी का नहीं है. यह लोकतंत्र आपका है. यह देश जनता का है. अगुवाई चाहे जिसने की, चाहे जो कर रहा है, या जो भी करेगा, वह इस देश का मालिक नहीं है. वह मात्र सेवक है. आपको यह समझना है कि आप किसी को नेता चुनते हैं तो वह सिर्फ देश को प्रगति पर ले जा सकता है. अगर वह देश पर हमला करता है तो उससे हाथों से वह ताकत छीन लीजिए, जिसे आपने सौंपी है. 


यह देश आपका है. 


जय हिंद!


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